क़दम देख के चलना,
अतीत को ले के चलते हो।
पैदा हुआ नहीं है जो उसको,
तुम यतीम कर के चलते हो।
ये भंग तुम्हारी है,
ये जंग तुम्हारी है।
इन ख़ून से सनी हवाओं में,
किसके क़श भरते हो?
क़दम देख के चलना,
तुम्हारा कल तुम्हारे कल की पहचान है।
इस प्रतिघात की कसौटी पर,
जुर्म-ओ-ज़ुल्म के मुखौटे पर,
कितना ख़रा उतरते हो?
तुम क्या दुनिया से डरते हो!
यूँ की हम सब जान रहे हैं,
सूची-सामग्री बाँध रहे हैं।
क्या लेके आए थे हम?
क्या ख़ाक लेकर तुम जाते हो?
भाषा पे मत जाना मेरी,
तहज़ीब ना सिखलाना ये भी,
मेरा अपना अन्दाज़ है,
तुम कहाँ की लाते हो?
साये से डर लगने लगा है,
एक अनजान ख़ौफ़ घर करने लगा है।
के हम साथ हैं पर साथ नहीं,
क्या पता तुम कोई चाणक्य-धारी हो?
जान बड़ी या माल बड़ा है,
उससे बड़ा एक सवाल खड़ा है,
जिस ख़ून के जन्मे हो तुम?
लानत है! क्या उसी की दलाली हो?
अरे, मौत की क़व्वाली हो?!
मौत के कुछ पलछिन बाद ये भी हो सकता है,
क़ू-ब-क़ू, हू-ब-हू हो सकता है।
तेरा कल तुझे बुलाता हो,
तेरे आज को मिटाने को।
अतीत को ले के चलते हो।
पैदा हुआ नहीं है जो उसको,
तुम यतीम कर के चलते हो।
ये भंग तुम्हारी है,
ये जंग तुम्हारी है।
इन ख़ून से सनी हवाओं में,
किसके क़श भरते हो?
क़दम देख के चलना,
तुम्हारा कल तुम्हारे कल की पहचान है।
इस प्रतिघात की कसौटी पर,
जुर्म-ओ-ज़ुल्म के मुखौटे पर,
कितना ख़रा उतरते हो?
तुम क्या दुनिया से डरते हो!
यूँ की हम सब जान रहे हैं,
सूची-सामग्री बाँध रहे हैं।
क्या लेके आए थे हम?
क्या ख़ाक लेकर तुम जाते हो?
भाषा पे मत जाना मेरी,
तहज़ीब ना सिखलाना ये भी,
मेरा अपना अन्दाज़ है,
तुम कहाँ की लाते हो?
साये से डर लगने लगा है,
एक अनजान ख़ौफ़ घर करने लगा है।
के हम साथ हैं पर साथ नहीं,
क्या पता तुम कोई चाणक्य-धारी हो?
जान बड़ी या माल बड़ा है,
उससे बड़ा एक सवाल खड़ा है,
जिस ख़ून के जन्मे हो तुम?
लानत है! क्या उसी की दलाली हो?
अरे, मौत की क़व्वाली हो?!
मौत के कुछ पलछिन बाद ये भी हो सकता है,
क़ू-ब-क़ू, हू-ब-हू हो सकता है।
तेरा कल तुझे बुलाता हो,
तेरे आज को मिटाने को।
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