Tuesday, 10 October 2017

सब्ज़ी की समस्या!

एक भोले पतिदेव खड़े थे बीच बाजार,
क़तर में ऐसे थे कई हज़ार।

बीवी ने भेजी थी एक सामग्री,
थी मची पति के दिमाग में अफरा तफरी!

टमाटर, आलू आदि देख,
जब उनको पानी आता था।
आज वही कम्बख्त सब्जी देख,
उनका सर चकराता था।

किसी का असाधारण आकार था,
तो कोई कीड़े का शिकार था!

आये जनाब लेने टमाटर,
तो किसी ने दिखाया शीशा बार बार।
जब देखा आईने में,
तो लाल हो गए थे उनके रुखसार!

कोई था बासी, किसी का हरा रंग था,
टमाटर की विचित्रता से, आदमी तंग था।

घर पहुचे तो पत्नी को बोले पतिदेव,
अबसे पूजा करूंगा तुम्हारी सदैव।

कैसे तुम एक आलू को, ढंग से परख पाती हो?
टमाटर को भी कहाँ से तुम, ढून्ढ ढून्ढ कर लाती हो?

हंस कर बोली बीवी,
मैं तो आसान काम करती हूँ।
जब भी लेती हूँ आलू,
तुम्हारा चेहरा याद करती हूँ!

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