Saturday, 6 December 2014

तुम्हारे चेहरे पर उदासी क्यों छाई है?

देखो मौसम कितना सुहावना है, चिड़ियाँ चहक रही हैं,
देखों यह ज़मीन हरियाली से परिपूर्ण, कितनी सुन्दर लग रही है।
जब ईश्वर ने इतनी सुन्दर यह दुनिया बनाई है,
तुम्हारे चेहरे पर उदासी क्यों छाई है?

धरती की माटी से एक अजब खुशबू आई है, बारिश का संदेसा लाई है,
धरती इतनी खूबसूरत लग रही है, चाँद में भी कमी दिखला रही है,
जब ईश्वर ने इतनी सुन्दर यह दुनिया बनाई है,
तुम्हारे चेहरे पर उदासी क्यों छाई है?

तुम देखो इस जग में, लोग मस्त-मालंग है,
तुम आखिर खामोश क्यों हो?
छोड़ दो इस चुप्पी का दामन, इसमें क्या रखा है?
ज़िन्दगी के मज़े जी भर के लो!

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