आधे आधे वादे,
वो आधी आधी नींद में काटी,
आधी आधी रातें।
सादा मेरा इश्क़ मगर वो आधा आधा लगता है,
खत लिखता हूँ महबूबा को, चेहरा आधा दिखता है।
कब जाने सर चढ़ गईं, घर कर गईं फज़ूल की बातें,
आधी आधी कसमें हैं,
आधे आधे वादे।
वो ख़्वाब भी क्या ख़्वाब है जो दोबारा ना बिक सके,
वो आधा ही सादा है, जो पूरा सा दिख सके।
सुर्खियों को पढ़कर याद आती हैं हर्फ़ की आहें,
आधी आधी कसमें हैं,
आधे आधे वादे।
तस्करी निभाते निभाते कहाँ पहुँच चुका हूँ,
मैं अपने ही जिस्म-ओ-आवाज़ में आधा बंट चुका हूँ।
आधे मेरे जलवे हैं, आधे मेरे इरादे।
आधी आधी कसमें हैं,
आधे आधे वादे।
फ़ुरसत मिले तो इस किरदार से इश्क़ फ़ॉर्मना,
मालूम है मुझे, ज़ालिम है ज़माना।
अमावस सनी है हवस की आहों से,
पुरनूर रातें सजी हैं फ़रेबी सितारों से।
चले आओ के चाँद आधा है,
करनी है कुछ बातें।
आधी आधी कसमें हैं,
आधे आधे वादे।
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