दीद-ए-दिल से यार के मुझको भला पाना क्या है?
हर्फ़-तहरिरों के फ़न से मुझको दिखलाना क्या है?
हो कसक स्याही में पुख़्ता, हो तड़प दिल-ए-यतीम,
आबाद तुझको करके दुनिया को बसाना क्या है?
आ सका हो कोई साक़ी दर पे तेरे ऐ सनम,
गर पाया हो पा ख़ुल्द में तो फिर साक़ी को झुटलाना क्या है।
हम जानते हैं तेरे जलवों की हक़ीक़त, मगर ऐ महजबीं,
हो रही हैं बे-नूर रातें कुछ दिनों से, बता इरादा क्या है?
है ले रही ताउम्र तेरी वस्ल की वो एक दफ़ा,
जो इंतेक़ाम-ए-वक़्त में ना हो फ़ना वो दीवाना क्या है?
जो लिया तेरी मोहब्बत का जोग, मैं बे-इख़्तियार,
अब होश संभालूँगा तो पूछूँगा, बेख़ुदी क्या है?
बेख़ुदी में बे-हिसि सी आ रही है आजकल,
आया जो गली-ए-रक़ीब, पूछा तेरा पता क्या है?
जा जनेमन, बांधे कफ़न, मैं जा रहा हूँ लौट के,
तेरा पता तो मिल गया, मेरा बता क्या है?
हो मुबारक एक सफ़ीना ऐ हसीना, ग़ैर का,
काग़ज़ी कश्ती मेरी साहिल को ताकती क्या है?