Monday, 14 March 2016

इन्तेहाँ

हुआ सवेरा, नए दिन की शुरुआत, आज होना था विज्ञान का इन्तेहाँ,
निकले सब बच्चे सरपट, संकट के लिए तैयार।

कहीं कोई बोला 'जय बजरंग बलि', कहीं कोई बिलखता बोला 'हे राम!',
कहियों को याद आये जीज़स, किसी ने कहा, 'या अल्लाह!'

बजी घंटी चुनौती की, सूख गया सभी का लहू,
अब उन्हें बस बचा सकते थे आर्कमिडीज प्रभु।

खोला प्रश्न-पत्र तो देखा,
वही मन्हूस अंक-रेखा।
कहीं एक अंक के खतरनाक सवाल और कहीं पांच-पांच तड़का।

रखी सभने हिम्मत, पढ़ा प्रश्न-पत्र ध्यान से,
बिना आवाज़ के, मनो एकांत में।
तभ जाकर उन्हें समझ में आया,
यह सभ तो अध्यापिका ने, पहले ही था पढ़ाया!
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इन्हीं बच्चों की तरह, रहो सावधान,
एक बार नहीं, पढ़ो प्रश्न-पत्र बार-बार,
हल हो जाएंगे, तुम्हारे सभी कठिन सवाल।

All the best for exams, everyone!
-Karan Dhall

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