आँखें खोल कर देखो,
रंगों का मौसम है आया।

सजी हुई हैं थालियाँ देखो ,
गुजिया, पापड़ और गुलाल !
सफ़ेद कमीज़ भी हो गयी है गुलाबी,
ताज़े फौवारों-सी यह पिचकारी।
चढ़ा हुआ है होली का रंग,
रंगों कि दीवाली।
भूल जाओ भेदभाव,
भूल जाओ लड़ाई।
रहो सभी प्यार से,
देखो होली आयी।
Now that was AMAZING.
ReplyDeleteYou write really good in Hindi, too. :)