Tuesday, 11 March 2014

Holi

आँखें खोल कर देखो,
रंगों का मौसम है आया।
सजी हुई हैं थालियाँ देखो ,
गुजिया, पापड़ और गुलाल !

सफ़ेद कमीज़ भी हो गयी है गुलाबी,
ताज़े फौवारों-सी यह पिचकारी।
चढ़ा हुआ है होली का रंग,
रंगों कि दीवाली।

भूल जाओ भेदभाव,
भूल जाओ लड़ाई।
रहो सभी प्यार से,
देखो होली आयी।

1 comment:

  1. Now that was AMAZING.
    You write really good in Hindi, too. :)

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