Friday, 24 May 2019

जज़्बात

मैं अश्क हूँ, अल्फाज़ हूँ,
किसी तराने की साज़ हूँ।
किसी शायर का ख़याल हूँ,
एक अनसुनी आवाज़ हूँ।

मैं ख़ुशी हूँ, दर्द हूँ,
मैं ज़ुबान का क़र्ज़ हूँ।

मैं कलाकारों का फ़र्ज़ हूँ,
मैं दवा हूँ, मैं ही मर्ज़ हूँ।

मुझे ऐ दुनिया, क्यों ढूंढती है दरबदर?
मैं तो तेरा सफर, तेरी मंज़िल हूँ।
मैं हूँ तो धरती पर, मगर फ़क़त, एक जज़्बात हूँ।